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युगांडा से भगाए गए हिंदुओं का दर्द और तत्कालीन कांग्रेस सरकार की उपेक्षा

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श्री सनातन धर्म मंडल मंदिर (Kamla, Uganda)  नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान जब लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने  युगांडा से आए हिंदुओं का उल्लेख किया तो वहाँ से 1972 में जबरदस्ती निर्वासित किए गए 65000 हिंदूओं का दर्द ताजा हो गया। भारत में सामान्यत: इन हिंदुओं के बारे में जानकारी का अभाव है। नई पीढ़ी को तो छोड़ ही दीजिए, पुराने लोग भी उनके बारे में ना के बराबर ही जानते हैं। मेरे प्रिय मित्र डॉ. शिववृत मोहन्ती उर्फ तपु जो वनवासी बंधुओं के बीच सेवा कार्य करते हैं उन्होंने उन हिंदुओं के दर्द को समझ कर उसे सामने लाने का प्रयास करते हुए लेख लिखा। आंशिक संपादन के बाद वह लेख आपके लिए प्रस्तुत है- युगांडा 85 प्रतिशत ईसाई तो 14 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या वाला देश है। पूर्व में यह देश भी ब्रिटेन का गुलाम था।इसी के कारण यहां से बहुत सारे भारतवासी युगांडा गयें थे जिसमें आधे गुजरात से तो आधे सम्पूर्ण भारत से थे। भारतवासियों ने वहाँ जाकर अपने पुरूषार्थ का पसीना बहाया जिसके फलस्वरूप वे वहाँ जाकर समृद्ध बन गये। उद्योग -धंधे से लेकर राजनीति तक में भारतीयों का सिक्का चल पड़ा। ...

स्कूलों और विश्वविद्यालयों में तिरंगा

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पिछले दिनों मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को अपने परिसरों में प्रतिदिन 207 फीट ऊंचा तिरंगा झंडा फहराने का आदेश दिया है। इस आदेश के दो दिन बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी बेसिक स्कूलों में माह की प्रत्येक पंद्रह तारीख को तिरंगा फहराकर राष्ट्रप्रेम दिवस मनाने का आदेश पारित किया है, जिससे बचपन से ही राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित हो सके। इन निर्णयों का निश्चित ही स्वागत किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय जैसे परिसरों में जहां विद्यार्थियों का नियमित आना-जाना रहता है वहां पर राष्ट्रभक्ति की भावना के प्रसार का यह अत्यंत श्रेष्ठ तरीका माना जा सकता है। आज जहां कुछ विश्वविधालयों के परिसरों से उठे देशविरोधी नारेबाजी और अराजक गतिविधियों से प्रेरित कर्कश स्वरों ने पूरे देश का वातावरण दूषित किया है वहां ऐसे प्रयोगों से निश्चित ही लाभ मिलेगा। हालांकि यह अपने आप में दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, संस्कार, नैतिकता और महापुरुषों की जीवनियां हमारे विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को सुनिश्चित करने में कहीं न कहीं असफल ही रहे हैं। विभिन्न भाषाओं में ह...