बर्बर और निंदनीय इस्लाम का शाब्दिक अर्थ है ’शांति’। लेकिन इस धरती पर सर्वाधिक रक्तपात #ISLAM के नाम पर ही हुआ है। इस्लाम के स्वयंभू जिहादियों ने एक बाद फिर पैगंबर के अपमान का बदला लेने के लिए पेरिस में दस निहत्थे पत्रकारों को मौत के घाट उतार दिया। अभी पाकिस्तान में स्कूल के बच्चों का कत्लेआम धुधलाया भी न था कि पेरिस में घटना घट गई। इस बर्बर कृत्य की जितनी निंदा की जाए कम है। यह तथ्य भी अपनी जगह है कि लगातार मिल रही चेतावनियों के बावजूद अखबार ऐसे कार्टून छाप रहा था जिससे अल्लाह के बंदों की भावनाएं आहत हो रही थीं। निसंदेह अखबार की गलती थी और उसके किए को उचित नहीं ठहराया जा सकता लेकिन आज के इस दौर में बौद्धिक आक्रमण का जवाब गोलीबारी से देना भी कहीं से जायज नहीं ठहराया जा सकता। संचार प्रधान वर्तमान दौर में उस अखबार के कृत्यों के खिलाफ एक जनमत खड़ा किया जा सकता था। उसके पत्रकारों को असहिष्णु और दूसरे धर्मों का आदर न करने वाला घोषित किया जा सकता था। बातों और मुलाकातोें से भी बात बन सकती थी। बहुत रास्ते थे। लेकिन निहत्थे लोगों पर अचानक बंदूक की गोलियों की बौछार, नितांत कायराना हरकत है। मुस...
Posts
Showing posts with the label #paris attack