दिल्ली के दंगल का संदेश
चुनावी राजनीति यूं तो सदैव ही आम और खास की जिज्ञासा जागरण का कारण रही है लेकिन दिल्ली के वर्तमान विधानसभा चुनाव जिस स्तर पर पहुंच गए हैं, वह स्तर कम ही देखने को मिलता है। इस चुनाव में पार्टियां महत्वपूर्ण नहीं हैं, नेता महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू जिसने देश-दुनिया को लगातार अपने प्रभाव में ले रखा है उसे, राजनीति में नौसीखिये अरविंद केजरीवाल ने चुनौती दी है। मतदाता किसे समर्थन देंगें या एक बार फिर दोनों को बगलें झांकने पर मजबूर करेंगे, ऐसे प्रश्नों के करण कौतुहल का स्तर लगातार बड़ रहा है। मीडिया में चल रही बहसें और चुनावी सर्वेक्षणों के महत्व अपनी जगह हैं लेकिन जिस गति से नई और पुरानी राजनीतिक पार्टियां और नेता लगातार राजनीतिक वर्चस्व बनाने के लिए तिकड़म भिड़ाने लगे हैं और आम मतदाता के सामने भ्रामक स्थितियां पैदा करने में माहिर हो गए हैं, तो मानना चाहिए कि अब समय आ गया है जब देश के मतदाताओं को भी राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित किया जाए। भारत की जनता की बड़ी समस्या है राजनीतिक जागरूकता का अभाव। यदि आम नागरिक राजनीतिक रूप से जागरूक ह...