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जानिए- कौन और क्यों वीर सावरकर को नहीं मानता ‘वीर’ और महाराणा प्रताप को ‘महान’

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मार्क्सवादी फोबिया से ग्रस्त कांग्रेसियों के लिए न तो वीर सावरकर  ‘वीर’  हैं और न ही महाराणा प्रताप  ‘महान’ । हां, चित्तौड़गढ़ में 40,000 लोगों का नरसंहार कर अजमेर शरीफ पर सजदा करने वाला अकबर जरूर इनके लिए महान है। अकबर के समय में लिखे गए राजदरबारी फारसी वृत्तान्त ही इनके ऐतिहासिक स्रोत हैं। राजस्थान के लिखित और वहां पढ़े जाने वाले साहित्य को ये देखना तक उचित नहीं समझते, क्योंकि इनकी मानसिकता मार्क्स के इस कथन से आज भी ग्रस्त है कि भारत का कोई इतिहास ही नहीं है। भारत का इतिहास तो केवल आक्रांताओं का इतिहास है। ऐसी मानसिकता से पीड़ित लोग भारतीय इतिहास के हर गौरवशाली पक्ष को दरकिनार कर केवल भारत को कोसना जानते हैं। अपने आपको मार्क्सवादी इतिहासकार कहने और ‘जनता का इतिहास’ लिखने का दावा करने वाले इन लोगों के लिए केवल मुगलों की चाकरी करने वाले दरबारियों द्वारा लिखित घटनाक्रम ही इतिहास है और बाकी सब कहानियां-किस्से हैं। वास्तव में, इनका इतिहास लेखन विशुद्ध रूप से राजनीतिक लेखन है। तथ्यों को दबाना, उन्हें तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना इनका घोषित लक्ष्य है। कहीं-कहीं तो ये दरबारी इतिह...

देखें 2019 के यादगार 12 फोटो, आपको भी बहुत पसंद आएंगे

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1.  जबर्दस्त बर्फीली हवाओं के बीच देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए सजग वीर सैनिक  सेल्यूट है सभी सैनिकों को  2.   भारत माता के गोद में खेलते उसकी वास्तविक और सुंदर बेटी 3.   बर्फ की चादर से ढके बाबा केदारनाथ का धाम 4.   इस बार क्रिसमस पर यह बड़ा ही जोरदार चित्र किसी ने पोस्ट किया, जिसमें "सेंटा" बाबा भोलेनाथ से आशीर्वाद लेता हुआ दिखाई दे रहा है- 5.   26 फरवरी 2019 को बालबाला आतंकवादी कैंप पर  Air Strike करने वाला मिराज 2000 फाइटर एयरक्राफ्ट जिसने अमेरिका तक को चौंका दिया 6.   ये दो चित्र बचपन में माता-पिता द्वारा अपने बच्चों को दिए संस्कारों को प्रदर्शित करते हैं। यदि संस्कार अच्छे हों तो बच्चा राष्ट्रप्रेमी बनता है,  यदि संस्कार खराब हों तो बच्चा आतंकवादी बन जाता है- 7.   यह दुनिया भरोसे पर टिकी है। भरोसा करना इस बच्चे से सीखें और भरोसा निभाना इस गौमाता से- 8.   जंगल के राजा शेर ने जब सड़क पर अनशन करने की ठानी तो बड़ी-बड़ी गाड...
-  देखें 2019 के यादगार 12 फोटो, आपको भी बहुत पसंद आएंगे -  पाकिस्तान की रिंकल कुमारी के आंसू भारत के सेकुलरों को क्यों नहीं दिखते... -   जानिए, क्या हैं नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 की 10 महत्वपूर्ण बातें -   पाकिस्तान के स्कूलों में पढ़ाया जाता है- हिंदू बर्बर और धूर्त होते हैं ! -   युगांडा से भगाए गए हिंदुओं का दर्द और तत्कालीन कांग्रेस सरकार की उपेक्षा -   जानें- क्या है NPR तथा एनआरसी और एनपीआर में क्या है अंतर -   जानिए- श्री रामजन्मभूमि पर निर्णय देने वाले जस्टिस रंजन गोगोई किस राजवंश से संबंधित हैं और  उस राजवंश का गौरवशा ली इतिहास -   महाभारत का एक रोचक प्रसंग जो मन-मस्तिष्क को झकझोर देगा... -   जानिए- अठारह पुराणों के नाम और उनका संक्षिप्त परिचय -   जानिए- कौन और क्यों वीर सावरकर को नहीं मानता ‘वीर’ और महाराणा प्रताप को ‘महान’

पाकिस्तान में हिंदुओं को समझते हैं अछूत, उनके लिए घर में होती है अलग प्लेट

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तारिक फतेह नई दिल्ली:  पाकिस्तानी कैनेडियन तारिक फतेह ने पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर के ट्वीट का समर्थन करते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं पाकिस्तान में हिंदुओं की बहुत बुरी हालत है. पाकिस्तान में हिंदुओं को अछूत समझा जाता है. अगर पाकिस्तान से भागकर हिंदू भारत नहीं आएगा तो कहां जाएगा और अगर भारत सरकार उन्हें नागरिकता देती है तो कौन सा गलत कर रही है. भारत के मुसलमानों ने डिक्टेटरशिप अभी देखी नहीं है. उन्होंने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया जैसी संस्था को बंद कर देना चाहिए. तभी सही मायने में सेकुलरिज्म होगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर ने हाल ही में एक ट्वीट किया था. ट्वीट में उन्होंने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज दानिश कनेरिया का जिक्र किया. जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दानिश कनेरिया के हिंदू होने की वजह से उसके साथ गलत व्यवहार होता था. कई पाकिस्तानी मुस्लिम क्रिकेटर उसके साथ बैठकर खाना खाना भी पसंद नहीं करते थे और ऐसे में अगर कोई पाकिस्तान में रह रहा हिंदू भारत आता है तो इसमें कुछ गलत नहीं  हिन्दुओं के लिए अलग प्लेट इसी विषय पर बात करते ...

जानें- क्या है NPR तथा एनआरसी और एनपीआर में क्या है अंतर

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नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) पर मचे घमासान के बाद केंद्र की मोदी सरकार अब नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (National Population Register) (NPR) लाने की तैयार कर रही है। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी राष्ट्रीय जनगणना रजिस्ट्रर NPR के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है। इसमें देश के हर नागरिक की जानकारी दर्ज होगी। एनपीआर हर दस साल में होने वाली जनगणना का हिस्सा है। देश के सभी निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना एनपीआर का मुख्य उद्देश्य है। इस डाटा में जनसंख्या के आंकड़ों के साथ ही भारत के हर ना‍गरिक की बायोमीट्रिक जानकारी भी दर्ज होगी। आधार कार्ड की तरह ही इस बार एनपीआर में भी आंखों की रैटिना और फिंगर प्रिंट भी लिए जाएंगे। एनपीआर का फायदा  सरकार के पास देश में रहने वाले हर निवासी की जानकारी होगी। एनपीआर का उद्देश्य लोगों का बायोमीट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ असली लाभार्थियों तक पहुंचाना भी है।   मनमोहन सिंह...

जानिए- अठारह पुराणों के नाम और उनका संक्षिप्त परिचय

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भारत के प्राचीन ज्ञान को समझने के लिए पुराणों का विशेष महत्व है। निम्नलिखित 18 पुराणों का वर्णन हमें प्रसिद्ध इतिहासविद डॉ. सुगम आनंद जी की एक पोस्ट से मिला है अतः जैसा का तैसा आपके लिए प्रस्तुत है  -- पुराण शब्द का अर्थ है 'प्राचीन कथा' । पुराण विश्व साहित्य के प्रचीनत्म ग्रँथ हैं। उन में लिखित ज्ञान और नैतिकता की बातें आज भी प्रासंगिक, अमूल्य तथा मानव सभ्यता की आधारशिला हैं। वेदों कीमत भाषा तथा शैली कठिन है। पुराण उसी ज्ञान के सहज तथा रोचक संस्करण हैं। उन में जटिल तथ्यों को कथाओं के माध्यम से समझाया गया है। पुराणों का विषय नैतिदकता, विचार, भूगोल, खगोल, राजनीति, संस्कृति, सामाजिक परम्परायें, विज्ञान तथा अन्य विषय हैं। विशेष तथ्य यह है कि पुराणों में देवा-देवताओं, राजाओ, और ऋषि-मुनियों के साथ साथ जन साधारण की कथायें भी उल्लेख करी गयी हैं जिस से पौराणिक काल के सभी पहलूओं का चित्रण मिलता है। महृर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया है। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश्वर उन पुराणों के मुख्य देव हैं। त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान स्वरूप को छः पुराण समर्पित क...

युगांडा से भगाए गए हिंदुओं का दर्द और तत्कालीन कांग्रेस सरकार की उपेक्षा

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श्री सनातन धर्म मंडल मंदिर (Kamla, Uganda)  नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान जब लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने  युगांडा से आए हिंदुओं का उल्लेख किया तो वहाँ से 1972 में जबरदस्ती निर्वासित किए गए 65000 हिंदूओं का दर्द ताजा हो गया। भारत में सामान्यत: इन हिंदुओं के बारे में जानकारी का अभाव है। नई पीढ़ी को तो छोड़ ही दीजिए, पुराने लोग भी उनके बारे में ना के बराबर ही जानते हैं। मेरे प्रिय मित्र डॉ. शिववृत मोहन्ती उर्फ तपु जो वनवासी बंधुओं के बीच सेवा कार्य करते हैं उन्होंने उन हिंदुओं के दर्द को समझ कर उसे सामने लाने का प्रयास करते हुए लेख लिखा। आंशिक संपादन के बाद वह लेख आपके लिए प्रस्तुत है- युगांडा 85 प्रतिशत ईसाई तो 14 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या वाला देश है। पूर्व में यह देश भी ब्रिटेन का गुलाम था।इसी के कारण यहां से बहुत सारे भारतवासी युगांडा गयें थे जिसमें आधे गुजरात से तो आधे सम्पूर्ण भारत से थे। भारतवासियों ने वहाँ जाकर अपने पुरूषार्थ का पसीना बहाया जिसके फलस्वरूप वे वहाँ जाकर समृद्ध बन गये। उद्योग -धंधे से लेकर राजनीति तक में भारतीयों का सिक्का चल पड़ा। ...