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देखें 2019 के यादगार 12 फोटो, आपको भी बहुत पसंद आएंगे

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1.  जबर्दस्त बर्फीली हवाओं के बीच देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए सजग वीर सैनिक  सेल्यूट है सभी सैनिकों को  2.   भारत माता के गोद में खेलते उसकी वास्तविक और सुंदर बेटी 3.   बर्फ की चादर से ढके बाबा केदारनाथ का धाम 4.   इस बार क्रिसमस पर यह बड़ा ही जोरदार चित्र किसी ने पोस्ट किया, जिसमें "सेंटा" बाबा भोलेनाथ से आशीर्वाद लेता हुआ दिखाई दे रहा है- 5.   26 फरवरी 2019 को बालबाला आतंकवादी कैंप पर  Air Strike करने वाला मिराज 2000 फाइटर एयरक्राफ्ट जिसने अमेरिका तक को चौंका दिया 6.   ये दो चित्र बचपन में माता-पिता द्वारा अपने बच्चों को दिए संस्कारों को प्रदर्शित करते हैं। यदि संस्कार अच्छे हों तो बच्चा राष्ट्रप्रेमी बनता है,  यदि संस्कार खराब हों तो बच्चा आतंकवादी बन जाता है- 7.   यह दुनिया भरोसे पर टिकी है। भरोसा करना इस बच्चे से सीखें और भरोसा निभाना इस गौमाता से- 8.   जंगल के राजा शेर ने जब सड़क पर अनशन करने की ठानी तो बड़ी-बड़ी गाड...

जानिए- अठारह पुराणों के नाम और उनका संक्षिप्त परिचय

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भारत के प्राचीन ज्ञान को समझने के लिए पुराणों का विशेष महत्व है। निम्नलिखित 18 पुराणों का वर्णन हमें प्रसिद्ध इतिहासविद डॉ. सुगम आनंद जी की एक पोस्ट से मिला है अतः जैसा का तैसा आपके लिए प्रस्तुत है  -- पुराण शब्द का अर्थ है 'प्राचीन कथा' । पुराण विश्व साहित्य के प्रचीनत्म ग्रँथ हैं। उन में लिखित ज्ञान और नैतिकता की बातें आज भी प्रासंगिक, अमूल्य तथा मानव सभ्यता की आधारशिला हैं। वेदों कीमत भाषा तथा शैली कठिन है। पुराण उसी ज्ञान के सहज तथा रोचक संस्करण हैं। उन में जटिल तथ्यों को कथाओं के माध्यम से समझाया गया है। पुराणों का विषय नैतिदकता, विचार, भूगोल, खगोल, राजनीति, संस्कृति, सामाजिक परम्परायें, विज्ञान तथा अन्य विषय हैं। विशेष तथ्य यह है कि पुराणों में देवा-देवताओं, राजाओ, और ऋषि-मुनियों के साथ साथ जन साधारण की कथायें भी उल्लेख करी गयी हैं जिस से पौराणिक काल के सभी पहलूओं का चित्रण मिलता है। महृर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया है। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश्वर उन पुराणों के मुख्य देव हैं। त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान स्वरूप को छः पुराण समर्पित क...
गंगा पर चिंतित न्यायालय हम भारतवासियों के लिए ’गंगा’ शब्द का श्रवण या उच्चारण ऐसा भावनात्मक वायुमंडल पैदा करता है जैसे हम अपने मूलाधार से मिल रहे हों। गंगा को हमने नदी नहीं, मां माना है और गंगा जल को अमृत तुल्य। लेकिन काल के प्रवाह ने ऐसा उपभोक्तावाद हमारे मन-मस्तिष्क में स्थापित किया कि मां गंगा भयानक प्रदूषण से कराह उठी। तीस वर्ष पूर्व हमारा ध्यान गंगा को साफ करने की ओर गया तो हमने कुछ प्रयास प्रारंभ किये। लेकिन इन तीस वर्षों में जनता द्वारा मेहनत से कमाए गए लगभग दो हजार करोड़ रुपये तो सरकारी खाते से निकल गए लेकिन गंगा पहले से और अधिक गंदी ही नहीं हुई बल्कि कहीं-कहीं तो अपनी प्रासंगिकता भी खो बैठी। अब जब इस गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार की खिंचाई की और पूछा कि क्या इसी सरकार के कार्यकाल में गंगा की सफाई हो पाएगी? इस प्रश्न के पीछे कोर्ट की भावना सरकार को समय सीमा में बांधना तो है ही साथ ही इसे चुनावी भावनात्मक मुद्दा बनने से रोकना भी है। सरकार ने संभावना व्यक्त की है कि 2018 तक वह गंगा की सफाई का कार्य पूरा कर लेगी। ऐसे मामलों में सरकारों के आश्वासन कोई ...